टीस (Tees)

आज अस्सी पे पूरे एक हो जाते
एक कम पे अगर तुम रुक न जातीं
ज़िन्दगी मगर बदस्तूर आगे बढ़ रही है
बस तुम्हारा सर पे हाथ नहीं रहा माँ
तुम्हारे कमरे के आगे से जब भी मैं गुज़रता हूँ
मेरे कान तेरी आवाज़ को सुन लेते हैं
घर से निकलने से पहले एक पल को मैं अब भी ठहर लेता हूँ
बस, आजकल तुम से वो दवा के डोज़ वाली दो बातें नहीं हो पाती
मालूम है मुझे कि ये दौर सबके जीवन में आता है
इस की टीस को कोई मगर नहीं समझा पाता है
जो बीत गया वो गया जो है उसी को निभाना है
याद सदा आती है तुम्हारी जन्मदिन बस कविता का बहाना हैझलक (Jhalak)

देखते देखते पूरा एक साल बीत गया
श्रृष्टि के नियमानुसार फ़िर काल जीत गया
जीवन है, लगी तो रहती ही है आनी जानी
इस ताल को वश में कर पाया नहीं कोई ज्ञानी
समय और संवेदना हृदय की पीड़ा हर नहीं पाते
कुछ रिश्ते किसी भी जतन भुलाए नहीं भुलाते
साये जो हट जातें हैं बड़ों के कभी सिर से
लाख चाहे किसी के मिल नहीं पाते फ़िर से
जीवन का चक्का तो निरंतर घूमता ही रहता है
हर पल हर दिन एक नई कहानी गढ़ देता है
पात्र बदल जातें हैं कुछ, कुछ बदले आतें हैं नज़र
मोह का भी क्या है नया बना लेता है अपना घर
दौड़ती फिरती है ये यादें मगर कुछ बेलगाम सी
बातों और आदतों में ढूँढ लेती हैं झलक उनकी
बीते दिनों के किस्सों से अपना मन भर लेता हूँ
मन हो भारी तो उनको बंद आँखों में भर लेता हूँMother
I walk alone Trying to find a way back home I look for a landmark Yet I keep coming back to the start I am tired and strained The sights and sounds seem unfamiliar The shadows grow longer I am scared and frightened I see a light shining in the distance I open my eyes Yes, I am home A loving touch A hand runs its fingers through my hair It's you mother I am comforted by your tender loving care