• Hindi Poetry | कविताएँ

    जो कह न  सका

    कहने को तो बहुत कुछ है
    लेकिन आज भी कहा नहीं जाता
    
    ऐसा होता तो है मगर होता क्यों है
    के दिल में आया ख़याल अंजाम नहीं पाता
    
    काश के कह दिया होता जो कहना था
    फिर वक़्त पे मैं ये इल्ज़ाम न लगाता
    
    आपकी इज़्ज़त करना जिसे सोचा था
    उस एहतिराम को बीच का फ़ासला न बनाता
    
    अब उम्मीद यही करता हूँ हर बार ये
    के सुन ही लेते थे आप जो मैं ज़ुबान पे न लाता
    
    यक़ीनन पहुँच रहा होगा मेरा दर्द  भी ये
    वरना इतना मुझ से अकेले सँभाला नहीं जाता
    
    बस गयें हैं आप शायद अब कहीं मुझ में ही
    आप से जुदा चेहरा मेरा आईना नहीं बतलाता
    
    हर रोज़ रूबरू होता हूँ मैं यूँ अब आप से
    इसीलिए मैं इस बात का शोध नहीं मनाता
    
    कहने को तो बहुत कुछ है
    लेकिन आज भी कहा नहीं जाता

  • English Poetry

    Mother

    I walk alone
    Trying to find a way back home
    I look for a landmark
    Yet I keep coming back to the start
    I am tired and strained
    The sights and sounds seem unfamiliar
    The shadows grow longer
    I am scared and frightened
    I see a light shining in the distance
    I open my eyes
    Yes, I am home
    A loving touch
    A hand runs its fingers through my hair
    It's you mother
    I am comforted by your tender loving care