• Hindi Poetry | कविताएँ

    Shunya (शून्य)

    शून्य से जन्मा हूँ मैं
    और शून्य में मिल जाऊँगा
    इस मेल के अंतराल में
    जीवन काल मैं बिताऊँगा
    
    अल्प है किंतु ये
    पूर्ण ये विराम नहीं
    आज के गगन का
    अस्त सूर्य ये हुआ नहीं
    
    मात्र कुछ शब्द कह
    वाणी ये न थम पाएगी
    पंक्तियाँ इस वाक्य की
    महाकाव्य ही रच जायेंगी
    
    स्वयं है लिखि जा रही
    हस्त की ये रेखा नहीं
    सीख ली है हर उस बाण से
    जिसने लक्ष्य भेदा नहीं
    
    कर्म मैं अपना करूँ
    आगे बढ़ता जाऊँगा
    भाग्य की धरती से मैं
    फल नहीं उपजाऊँगा
    
    पाया जो पितृ-तात् से
    दंभ उसका किंचित् भी नहीं
    आशंका मात्र इतनी है
    वृद्धि उसमें कर पाऊँ कि नहीं
    
    नयनों को विश्वास है
    स्वप्न सच हो जाएँगे
    कष्ट करने वालों को
    कृष्ण मिल ही जाएँगे
    
    पथ पे चल पड़ा हूँ जिस
    आपदा का अब भय नहीं
    न मिले या मिलतीं रहें
    उपलब्धियाँ मेरा अस्तित्व नहीं
    
    शून्य हूँ मैं
    और शून्य में मिल जाऊँगा
    अंत की अग्नि में जल
    कल राख़ मैं बन जाऊँगा
    
  • English Poetry

    The Average Guy

    I am your average guy
    
    The kind that hold the door for you
    Instead of getting ahead on the sly
    
    I am your average guy
    
    The type you call your friend
    Not the hottie who you wanna try
    
    I am your average guy
    
    The one who sticks around
    Never leaves you hanging dry
    
    I am your average guy 
    
    Whose word you can rely on
    Not someone who’s default is a lie
    
    I am your average guy 
    
    Happy always to lose to you
    Not hide behind if, but and why
    
    I am your average guy
    
    Your very last first kiss
    The love you just couldn’t deny
    
    Yes I am just an average guy 
  • English Poetry

    The Wiseman’s Lament

    Fear not the fools
    For they have no pretence
    Fear the questions they ask
    For they may expose your ignorance
    
    Beware of the ignorant though
    They certainly are a dangerous lot
    Stubborn enough to keep facts at bay
    Smart enough to connive and plot
    
    Wisdom alone isn’t enough for the wise
    The wise must put it to opportune use
    For the fool doesn’t care much for knowledge
    The ignorant love status quo, tis change they refuse
    
    The fools have no concept of it
    The ignorant don’t find wasting it a crime
    Quest for knowledge is a burden for the wise
    Wisdom isn’t attained overnight, it accrues over time
    
    The world is fair and uniformly unkind to all
    No matter you are the fool, ignorant or wise
    The wise in their knowledge of it suffer more
    After all, “Ignorance is bliss in fool’s paradise”
  • English Poetry

    The Mind Shapers

    A tribute to all the potters
    Who shape the human mind
    To those who see each piece of clay
    And believe that it is one of a kind
    
    Their knowledge like deft fingers
    Shaping and moulding the clay
    Expertly spinning the wheel
    Fast at times, at times slowing play
    
    Carefully grinding and dusting
    Allowing the contours to appear
    Baking and glazing every single one
    To make them last many a year
    
    So here’s an expression of gratitude
    Towards all those wonderful artisans
    The teachers who have crafted us all
    Into becoming our best possible versions
  • English Poetry

    Unstoppable

    My nation stands at the precipice 
    A fledgling ready to leave the perch
    Yet a maven helming a new world 
    A beacon of a wise and vibrant past
    
    A billion hopes ready to take wing
    Aspirations waiting to fly high
    A populace with a newfound voice
    Diaspora that has found the spotlight 
    
    You know you can reach where you’re going 
    Once you know where you started from 
    India today is an idea whose time has come 
    Our tryst with our destiny has only just begun
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Us Raat Ki Baat (उस रात की बात)

    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    दिलचस्प क़िस्सों और यादों की होड़ सी थी
    नये पुराने रिश्तों बीच लगी एक दौड़ सी थी
    
    चेहरे जो धुंधला गए थे वो साफ़ खिल गए
    कुछ मलाल भी होंगे जो उस रात धुल गए
    
    बीते सालों का असर कहीं छिपा कहीं ज़ाहिर था
    गहराते रिश्तों के मंज़र का हर शक्स नाज़िर था
    
    इतनी हसीन थी मुलाक़ातें के शाम कम पड़ गई
    या यूँ कह दें की अपना काम बहती जाम कर गई
    
    ख़ुशियों का उठता ग़ुबार बारिश भी दबा न सकी
    लगी जो आग है मिलन की वो कब है रुकी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Khayal (ख़याल)

    ख़याल कुछ यूँ आया
    कि बहुत दिन हुए कुछ लिख़ा नहीं
    उसी के हाथ थामे ख़याल एक दूसरा आया
    कि बीते दिनों लिखने लायक कुछ दिखा नहीं
    
    अब ख़यालों का कुछ ऐसा है
    कि एक-दो पे कभी सिलसिला रुका नहीं
    फिर लगा कि इस बात पे ही कुछ कह देतें हैं
    कम होता है कि लिखने बैठें और क़ाफ़िया मिला नहीं
    
    दम भर ले शायरी का जितना भी
    बात ग़ाफ़िल ये मुख़्तसर सी है
    कि शायर तेरी भरी तिजोरी भी
    बिना लफ़्ज़ों के समझो ख़ाली ही है
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Kisi Roz (किसी रोज़)

    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    एक बार पीछे मुड के देखा के नहीं
    याद में हमारी दो बूँद रोये के नहीं
    
    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    जब भी गुज़रे होगे तुम गली से हमारी
    एक नज़र तो फ़ेराई होगी दर पे हमारी
    
    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    वो जो यादें बनाई थीं उन यदों का क्या हुआ
    वो जो क़समें लीं थी उन क़समों का क्या हुआ
    
    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    के इतने बरसों में तुमने क्या क्या भुला दिया
    जो थी कशिश दरमियाँ उसे कैसे मिटा दिया
    
    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    क्या समझे थे जिसे वो प्यार था भी या नहीं
    क्या ये दर्द बेवजह है और तुम बेवफ़ा नहीं
    
    कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
    
    
  • English Poetry

    Armageddon

    Things aren’t always
    As they seem the wise say
    Life is after all, about the greys
    And the games people play

    Be wary of the silences
    For in them lie the seeds
    Of perceptions and pretences
    Scheming and devious deeds

    Minds with power to spread fear
    No sweat broken when a lie is told
    Bereft of emotion, never ever a tear
    Ethics pawned and conscience sold

    Gather ye the guardians of good
    For the hour of reckoning has come
    Stand for what’s right as you should
    Fight for all and not just for some

    The brave must protect and fight
    For the meek to inherit the earth
    Light torches, shine the path bright
    Time to show what truth is worth

    Blow hard, blow high, blow strong
    Drive those storm clouds far away
    For good takes time to come along
    When it does, hold on, make it stay




  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Ekant (एकांत)

    बीती रात खिचे परदों के उस तरफ
    कड़कती बिजली, तेज़ हवाओं का शोर
    और गरजते बादलों का कोलाहल था
    इस तरफ़ था बीतते पलों का एहसास

    कट गई या करवटों में काट दी
    चैन की नींद मानो एक एहसान थी

    आँख जब खुली तो सन्नाटा सा था
    परदों के बीच एक किरण फूट रही थी
    जैसे उस पार के नज़ारे का न्योता दे रही थी
    भोर का चित्त निशा के विपरीत मौन था

    खुले परदों और गुज़री रैन के कालांतर में
    एकांत का वज़न और बदला दृष्टिकोण था