• English Poetry

    A Date with a Memory

    How does one prepare To face impending despair What do you do When you know the blues are going to hit you You see the pages of calendar turn A date with a memory awaits Passing time hasn't yet healed the burns Of a day when you were hit by a cruel twist of fate You try to move on Carefully treading down memory lane Past flashing images of a loved one gone The heart laments, aches and pains The day passes punctuated with awkward silences With the mind and heart attempting conversation What one says the other refuses Each year its the same situation Someday the mind hopes the…

  • English Poetry

    The Perfect Circle

    I pen these lines to say ‘Thank You’ on what my little one says is Friendship DayThere are indeed things to express and today’s as good as any other dayAlways maintained and truly believe that friends are the family one can chooseOur most potent weapons always ready at our behest to convince, corrupt or confuseTo all the friends who befriended me or I ever madeAt work, the university, the neighbourhood or first gradeClose or distant so many of you have had a role to playIn shaping me into the person I am from the proverbial clayTo those who really don’t fit the classical definition of a friendThe ones that are…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    तू है…के नहीं?

    आज एक याद फ़िर ताज़ा हो चली है संग वो अपने सौ बातें और हज़ार एहसास ले चली है तोड़ वक़्त के तैखाने की ज़ंजीरें खुली आँखों में टंग गयी बीते पलों में बसी तस्वीरें सुनाई साफ़ देती है हर बात अफ़सानों का ज़ायका और निखर गया है सालों के साथ दर्द और ख़ुशी का अजब ये मेल है संग हो तुम फिर भी नहीं हो बस यही क़िस्मत का खेल है

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    फ़िलहाल

    कुछ दिनों से ऐसा लग रहा है के ज़िंदगी के माइने बदल गए इतना बदला हुआ मेरा अक्स है लगता है जैसे आइने बदल गए अभी तो कारवाँ साथ था ज़िंदगी का जाने किस मोड़ रास्ते जुदा हो गए अब तो साथ है सिर्फ़ अपने साये का जो थे सर पर कभी वो अचानक उठ गए यूँ लगता जैसे किसी नई दौड़ का हिस्सा हूँ किरदार कुछ नए कुछ जाने पहचाने रह गए शुरूवात वही पर अंत नहीं एक नया सा क़िस्सा हूँ जोश भी है जुंबिश भी जाने क्यूँ मगर पैर थम गए एहसास एक भारी बोझ का है सर और काँधे पे भी पास दिखाई देते थे जो…

  • English Poetry

    Drifting

    Sometimes you are struck By a feeling that overwhelms A strange discomforting sense Of a total lack of control You are drifting The waters are calm You sense no turbulence Just an inexplicable fear Uneasy and unware You are still but sinking You seek happiness Peace and joy A good life You try maintain pace The ground beneath is shifting Get a grip You coax yourself Draw deep for strength Look around for motivation Believe there’s a silver lining Winds change direction Things fall into place You get dealt a good hand Hmmm you wonder if The tide is turning Green shoots around you Blue skies on the horizon You…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    ए ज़िन्दगी

    ज़िंदगी तुझ से न कम मिला न ही ज़्यादा पाया खुशियाँ मिली तो गमों का भी दौर आया मिली दीवाली सी रोशनी तो कभी दिया तले अंधेरा पाया तूने जब दी तनहाई मुड़ के देखा तो साथ कारवाँ पाया क्यों करें शोक हम तेरी किसी बात का क्यों ज़ाया करें अभी तुझ पे जस्बात तू जो भी दे मज़ा तो हम पूरा लूटेंगे गिरें गर कभी तो फिर उठ खड़े होंगे इंतेज़ार है उस दिंन का जब होंगे तेरे सामने तेरी हर एक देन को "once more" कहेंगे तब तक किसी चीज़ से शिकवा है न किसी से मलाल तू जो भी दे मंज़ूर है गवारा है हर हाल

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    फुर्सत

    ये फुर्सत क्यों बेवजह बदनाम है क्यों हर कोई यह कहता के उसको बहुत काम है इस तेज़ दौड़ती, बटे लम्हों में कटती ज़िन्दगी का, चलना ही क्यों नाम है कैसे रूकें, कब थामें, एक पल को भी न आराम है कब घिरे कब छटे ये बादल, आये गए जो मौसम सारे न किसी को सुध न ध्यान है पलक झपकते बोले और चले जो, अपना खून खुद से अनजान है ये फुर्सत क्यों बेवजह बदनाम है बस यही तो है जो अनमोल हो कर भी बेदाम है

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    ये जो है ज़िन्दगी…

    आजकल कुछ बदल सी गयी है ज़िन्दगी चलती तो है मगर कुछ थम सी गयी है ज़िन्दगी मानो मुट्ठी में सिमट ही गयी है ज़िन्दगी साढ़े पांच इंच के स्क्रीन में कट रही है ज़िन्दगी इंसानों से स्मार्ट फोनों में बढ़ती भीड़ के तन्हा कोनों में लोगो की बंद ज़ुबानों में कच्चे या पक्के मकानों में बस अब अकेले मुस्कुराने का नाम है ज़िन्दगी संग हमसफ़र के एकाकी बीतने का नाम है ज़िन्दगी आजकल कुछ बदल सी गयी है ज़िन्दगी चलती तो है मगर कुछ थम सी गयी है ज़िन्दगी आजकल बच्चे पड़ोस की घंटी नहीं बजाते गुस्सैल गुप्ता जी का शीशा फोड़ भाग नहीं जाते स्कूल बस के स्टॉप…

  • English Poetry

    Walk With Me

    Long walks on moonlit nights Hand in hand on sandy shores On the hills on an upward climb Tearing down the slope Ambling on lazy winter days A careful trudge through a muddy puddle Even on a blazing afternoon No matter where we are How hard or long the journey My all weather friend, my other half It's you I'd want to walk with me