तलाश (Talaash)

मुझे मिल तो रहीं थी
जिसकी कभी न कोई आस थी
शायद वो ख़ुशी अलग थी
जिसकी मुझे तलाश थी
उसकी नैमतों से कितना अनजान था
मेरा तो बस अपनी चाहतों पे ध्यान था
मेरी ज़िद से भी बड़ा मेरा एक अरमान था
ज़मीन की क़द्र न की के ऊपर आसमान था
उम्र मेरी अब जो धीरे धीरे ढलने लगी है
हसरतों की आग अब मद्धम होने लगी है
जो है हासिल उसकी अहमियत दिखने लगी है
एक नयी सी लौ अब मुझ में जलने लगी है
मंज़िल का नहीं अब सफ़र का इंतज़ार करता हूँ
अपना तो कर चुका अपनों का ख़्याल करता हूँ
सपनों में जो भरने है रंग उनको तैयार करता हूँ
ज़िंदा रहने से नहीं ज़िंदगी से प्यार करता हूँFriendship Lane

They’ll most certainly lie for you,
Spin tall tales at the drop of a hat,
Man, they make ‘em sound so true,
You’d kill to have a frat like that.
Take your trip with a straight face,
Draw immense joy from your pain,
Cause a pain in every wrong place,
No misses when there’s points to gain.
Friendships made whilst still young,
Hanging together turning days to nights,
Meaning every word of the songs they sung,
They turned into men destined for heights.
Lives got lived and careers got made,
The wheel of time continued to turn,
Decades slowly rolled into the next decade,
Conversations changed from heartbreaks to heartburn.
Time reset to where they’d hit pause,
Fifty something and they met again,
Everything back to the way it was,
Those three nights at Friendship Lane!कविता (Kavita)
कविता के बिना मैं अधूरा हूँ
जब चोट मुझे कोई लगती है
लहू को सियाही बना के बहाता हूँ
शब्द जो सिर्फ़ मेरी कलम कह सकती है
मैं अपने ही वास्तव से उन्हें चुरा के लाता हूँ
मेरे लिखे सारे पन्ने मेरी अपनी ही तो हस्ती है
जब भी मैं ख़ुश या उदास होता हूँ
और बेचैनी महसूस होने लगती है
संग सदा अपने इन शब्दों को मैं पाता हूँ
मेरी सोच, मेरे विचारों की अभिव्यक्ति है
कविता के बिना मैं अधूरा हूँ
मेरे शब्द ही मेरी पहचान मेरी शक्ति हैFailure – Stepping Stone or Path to Condemnation
Reflections @ 50 plus
Bye-bye Birdie

The wheel of time has spun,
One of our brood has spread her wings and flown away.
A new chapter in life’s just begun.
She steps through the portals of her university and begins a new day.
It’s a strange sensation, a concoction of anxiety and apprehension.
There is also an overwhelming sense of joy that seems to pervade.
Protected and cared for all this while she encounters a new dimension.
Images of her first day at school keep getting played and replayed.
I remember the wide-open eyes, her as a newborn when I first held.
You’ve raised her well, Mama, know that she’ll quickly hit her stride.
I am beside myself seeing her turn into this woman who’s self-propelled.
It won’t be long before it’s her time to shine and you swell with pride.
And from here on, we all learn to live our lives anew.
As the older one finds herself, toughens up and gains knowledge.
We as parents fend and fight for one instead of two.
Students once again, learning lessons from life -the eternal college.तारे (Taare)

इस शहर में अब सितारे नहीं नज़र आते
बादलों में लुका-छुपी खेलते तारे नहीं टिमटिमाते
तरक्की बहुत कर ली है अब इस शहर ने
आसमान ही निगल लिया है इसकी चकाचौंध ने
ज़िंदगी की भी अब अपनी ही मसरूफ़ियत है
एक अजीब सी घुटन और बिगड़ी तबीयत है
मन भर सा गया है इन रोज़ तंग होती गलियों से
सब निशान ग़ायब हो रहे हैं यहाँ की तस्वीरों से
एक अरसे से उधेड़-बुन में लगा रहता हूँ
रोज़ एक नया शहर एक नया जहाँ बसा लेता हूँ
साँस लेता हूँ खुल के मैं उसकी साफ़ हवा में
साँझ ढले तारे ही तारे भर जातें हैं आसमान में
शायद मेरी ही उम्र का एक दौर चला है नया
ये शहर आगे बढ़ रहा है और मैं वहीं थम गया
रिश्ते और यादें यहाँ जड़ें कर चुकीं हैं गहरी
कैसे पाऊँ चैन कहीं और फ़ितरत ही है शहरीख़ामोशी (Khamoshi)

ख़ामोशी के खालीपन में
मैंने ख़ुद को खो दिया
तेरे इश्क़ के पागलपन में
अपनी हस्ती को ही डुबो दिया
तेरी यादों की बेइन्तहाई में
दिन और रैन की सुद को छोड़ दिया
बिछोड़े की इस तन्हाई में
मैंने अपनों से रिश्ता तोड़ दिया
तेरी बेवफ़ाई की इन बातों में
जाने कैसे ग़म से नाता जोड़ दिया
सजदे किये थे जिस रब की ख़ुदाई में
उसी ख़ुदा ने अपना रुख मोड़ दियाझलक (Jhalak)

देखते देखते पूरा एक साल बीत गया
श्रृष्टि के नियमानुसार फ़िर काल जीत गया
जीवन है, लगी तो रहती ही है आनी जानी
इस ताल को वश में कर पाया नहीं कोई ज्ञानी
समय और संवेदना हृदय की पीड़ा हर नहीं पाते
कुछ रिश्ते किसी भी जतन भुलाए नहीं भुलाते
साये जो हट जातें हैं बड़ों के कभी सिर से
लाख चाहे किसी के मिल नहीं पाते फ़िर से
जीवन का चक्का तो निरंतर घूमता ही रहता है
हर पल हर दिन एक नई कहानी गढ़ देता है
पात्र बदल जातें हैं कुछ, कुछ बदले आतें हैं नज़र
मोह का भी क्या है नया बना लेता है अपना घर
दौड़ती फिरती है ये यादें मगर कुछ बेलगाम सी
बातों और आदतों में ढूँढ लेती हैं झलक उनकी
बीते दिनों के किस्सों से अपना मन भर लेता हूँ
मन हो भारी तो उनको बंद आँखों में भर लेता हूँचिट्ठी (Chitthi)

मैं ख़ुश हूँ पापा
और मुझे मालूम है
के इस बात को जान
आप कई ज़्यादा ख़ुश होते
बीते चार सालों में
कुछ पाया और
बहुत कुछ खोया है
“जीवन है”, आप यही कहते
बड़ी वाली की बातों
छोटी की आदतों
आपकी बहू के अक्खड़पन में भी
आप मुझे नज़र आते हो
हर रोज़ मैं अपने आप को
आपके जैसे किसी साँचे में
ढालने की हिम्मत जुटाता हूँ
कुछ देर के लिए आप बन जाता हूँ
बातें तो बहुत और भी थीं
जो बताने सुनाने की सोची थी
आप पास ही हो कहीं शायद
क्योंकि इस ख़याल से अब भी सहम जाता हूँ