• Hindi Poetry | कविताएँ

    Saath (साथ)

    जब मंज़िलें धुंदली हों और जब रास्ते हो अनजाने क्या तुम साथ दोगे जब सासें फूलने लगे और चलना हो नामुमकिन क्या तुम साथ दोगे जब हौंसले हो तंग और जब हिम्मत न बन्धे क्या तुम साथ दोगे जब उम्मीदें जॉए बिखर और निराशा ही हाथ लगे क्या तुम साथ दोगे जब जेबें हो खाली और तेज़ भूक लगे क्या तुम साथ दोगे जब चिलचिलाती हो धुप और कहीं छाँव न दिखे क्या तुम साथ दोगे जब सब दामन चुरा लें और कोई मान न दे क्या तुम साथ दोगे जब सात वचन मैं लूँ ये और हाँ कह निभाऊँ उम्र भर उन्हें क्या तुम साथ दोगे

  • Anecdotes,  Musings & Short Stories

    F.R.I.E.N.D.S – Family You Can Choose!

    For most of us the growing up years of school are the times that we cherish. I bet many of us were asked to write essays on “My Best Friend”. Looking back at the years gone by, almost feel that friends are the family life lets you choose. Not to say that the I have complaints about the one I have (and no I’m not buttering up to my parents!!!).I’m sure all of us have those cousins who irritate us no end and uncles who are snoots and aunts who’s son is better than you at everything. But when it comes to friends its different. These are people you’ve chosen…

  • English Poetry

    An Ode… To Those Who Believed

    It's not easy to walk a different path To set off on a journey where questions abound The doubts they flourish when you are stepping onto roads That are foreseeably bumpy, uncharted, even inexistent Risking it all doesn’t mean absence of fear The clock is your enemy and the mirror isn’t your friend When you have only yourself to blame and to rely When there are no maps or guiding stars in the sky Tis the believers who hold the torch For the explorers on their onward march No birds ever flew without the wind beneath their wings It is their belief that fuels the hope each passing day brings

  • English Poetry

    The Perfect Circle

    I pen these lines to say ‘Thank You’ on what my little one says is Friendship DayThere are indeed things to express and today’s as good as any other dayAlways maintained and truly believe that friends are the family one can chooseOur most potent weapons always ready at our behest to convince, corrupt or confuseTo all the friends who befriended me or I ever madeAt work, the university, the neighbourhood or first gradeClose or distant so many of you have had a role to playIn shaping me into the person I am from the proverbial clayTo those who really don’t fit the classical definition of a friendThe ones that are…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    एक ऐसा यार

    न पूछे क्यों न सोचे कभी दो बार लड़ जाए भिड़ जाए सुन के बस एक पुकार रब करे सबको मिले बस एक ऐसा यार खाए जो बड़ी क़समें उठाए जो नख़रे हज़ार निभाए सारी वो रस्में झेलकर भी सितम करे प्यार दुआ है संग सदा मिले बस एक ऐसा यार पूरी करे जो तलब कश हो या जाम मिले तैयार महूरत मान ले फ़रमाइश को न दिन देखे न देखे वार जब मिले तेरे सा मिले बस एक ऐसा यार

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    यारी

    यादों के लम्बे पाँव अकसर रात की चादर के बाहर पसर जातें हैं आवारा, बेखौफ़ ये हाल में माज़ी को तलाशा लिया करतें हैं ख्वाबों में आने वाले खुली आँखों में समाने लगतें हैं फिर एक बार बातों के सिलसिले वक्त से बेपरवाह चलतें हैं वो नादान इश्क की दास्तानें वो बेगरज़ यारियाँ समाँ कुछ अलग ही बँधता है जब बिछडे दोस्त मिला करतें हैं यादों के लम्बे पाँव अकसर रात की चादर के बाहर पसर जातें हैं

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    दोस्ती की expiry date

    क्या दोस्ती की भी expiry date होती है या उम्र भर साथ की guarantee होती है कल की नोंक झोंक आज जाने क्यों दिल दुखाने लगती है अचानक कोई भूली बात जबरन आ आ के सताने लगती है ना मालूम क्यों उम्मीदों का traffic one way हो जाता है कभी हँसते थे संग जिसके वो क्यों रूला रूला के जाता है जो चैन देता था कल आज वही चुराता है शायद हर दोस्ती में ये दौर भी आता है ख़िज़ा की रुत होगी ये कभी न कभी तो बदल जानी है बहार जब तलक फिर न आए तब तक हर हाल निभानी है कहाँ दोस्ती की कोई expiry date होती…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    चलो… (कुछ करते हैं)

    चलो आज रात कहीं बैठ के पीतें हैं कुछ पुरानी बातें कुछ रूमानी संग भरते हैं बादलों में अपने रंग भूली यादों की लड़ी पिरोते हैं याद है जब चौक पे गाड़ी रोक के कभी नयी कभी अध जली सिगरेट जलाते थे फटे स्पीकरों से ऊँची आवाज़ में गीत गाते थे दोस्ती की क़समें खाते थे सीना ठोक के एक बार तो छोड़ भी आया था ना बीच राह में बनाया था कुछ अजीब सा ही बहाना ख़ूब हुई मिन्नतें चला था रूठना मनाना शब गुज़ारते हैं ऐसी ही किसी क़िस्से की बात में चलो आज रात कहीं बैठ के पीतें हैं कुछ अलग बातें कुछ बदले ढंग उड़ाते है…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    दोस्ती का हिसाब

    एक रोज़ बस यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे मस्ती, समझदारी, वफ़ादारी और बेवक़ूफ़ी के नाम हिस्से बटे कुछ दोस्त इधर बटे और कुछ यार उधर बटे कुछ तो ऐसे थे जो सोच से ही छटे एक रोज़ जब यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे सिर्फ़ मस्ती करने वाले दोस्तों की कसर न दिखी बेवक़ूफ़ियों और बेवक़ूफ़ों की गिनती भी कम न थी जब आढ़े वक़्त ने आज़मा के देखा तो एक-आध वफ़ादार भी मिले एक रोज़ जब यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे हमने जाना की कुछ दोस्त ऐसे भी थे जो किसी भी खेमे में न बट सके कुछ नायाब जो दोस्त से ज़्यादा थे,…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    एक ऐसा यार

    न पूछे क्यों न सोचे कभी दो बार लड़ जाए भिड़ जाए सुन के बस एक पुकार रब करे सबको मिले बस एक ऐसा यार खाए जो बड़ी क़समें उठाए जो नख़रे हज़ार निभाए सारी वो रस्में झेलकर भी सितम करे प्यार दुआ है संग सदा मिले बस एक ऐसा यार पूरी करे जो तलब कश हो या जाम मिले तैयार महूरत मान ले फ़रमाइश को न दिन देखे न देखे वार जब मिले तेरे सा मिले बस एक ऐसा यार