• English Poetry

    The Perfect Circle

    I pen these lines to say ‘Thank You’ on what my little one says is Friendship DayThere are indeed things to express and today’s as good as any other dayAlways maintained and truly believe that friends are the family one can chooseOur most potent weapons always ready at our behest to convince, corrupt or confuseTo all the friends who befriended me or I ever madeAt work, the university, the neighbourhood or first gradeClose or distant so many of you have had a role to playIn shaping me into the person I am from the proverbial clayTo those who really don’t fit the classical definition of a friendThe ones that are…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    एक ऐसा यार

    न पूछे क्यों न सोचे कभी दो बार लड़ जाए भिड़ जाए सुन के बस एक पुकार रब करे सबको मिले बस एक ऐसा यार खाए जो बड़ी क़समें उठाए जो नख़रे हज़ार निभाए सारी वो रस्में झेलकर भी सितम करे प्यार दुआ है संग सदा मिले बस एक ऐसा यार पूरी करे जो तलब कश हो या जाम मिले तैयार महूरत मान ले फ़रमाइश को न दिन देखे न देखे वार जब मिले तेरे सा मिले बस एक ऐसा यार

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    यारी

    यादों के लम्बे पाँव अकसर रात की चादर के बाहर पसर जातें हैं आवारा, बेखौफ़ ये हाल में माज़ी को तलाशा लिया करतें हैं ख्वाबों में आने वाले खुली आँखों में समाने लगतें हैं फिर एक बार बातों के सिलसिले वक्त से बेपरवाह चलतें हैं वो नादान इश्क की दास्तानें वो बेगरज़ यारियाँ समाँ कुछ अलग ही बँधता है जब बिछडे दोस्त मिला करतें हैं यादों के लम्बे पाँव अकसर रात की चादर के बाहर पसर जातें हैं

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    दोस्ती की expiry date

    क्या दोस्ती की भी expiry date होती है या उम्र भर साथ की guarantee होती है कल की नोंक झोंक आज जाने क्यों दिल दुखाने लगती है अचानक कोई भूली बात जबरन आ आ के सताने लगती है ना मालूम क्यों उम्मीदों का traffic one way हो जाता है कभी हँसते थे संग जिसके वो क्यों रूला रूला के जाता है जो चैन देता था कल आज वही चुराता है शायद हर दोस्ती में ये दौर भी आता है ख़िज़ा की रुत होगी ये कभी न कभी तो बदल जानी है बहार जब तलक फिर न आए तब तक हर हाल निभानी है कहाँ दोस्ती की कोई expiry date होती…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    चलो… (कुछ करते हैं)

    चलो आज रात कहीं बैठ के पीतें हैं कुछ पुरानी बातें कुछ रूमानी संग भरते हैं बादलों में अपने रंग भूली यादों की लड़ी पिरोते हैं याद है जब चौक पे गाड़ी रोक के कभी नयी कभी अध जली सिगरेट जलाते थे फटे स्पीकरों से ऊँची आवाज़ में गीत गाते थे दोस्ती की क़समें खाते थे सीना ठोक के एक बार तो छोड़ भी आया था ना बीच राह में बनाया था कुछ अजीब सा ही बहाना ख़ूब हुई मिन्नतें चला था रूठना मनाना शब गुज़ारते हैं ऐसी ही किसी क़िस्से की बात में चलो आज रात कहीं बैठ के पीतें हैं कुछ अलग बातें कुछ बदले ढंग उड़ाते है…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    दोस्ती का हिसाब

    एक रोज़ बस यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे मस्ती, समझदारी, वफ़ादारी और बेवक़ूफ़ी के नाम हिस्से बटे कुछ दोस्त इधर बटे और कुछ यार उधर बटे कुछ तो ऐसे थे जो सोच से ही छटे एक रोज़ जब यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे सिर्फ़ मस्ती करने वाले दोस्तों की कसर न दिखी बेवक़ूफ़ियों और बेवक़ूफ़ों की गिनती भी कम न थी जब आढ़े वक़्त ने आज़मा के देखा तो एक-आध वफ़ादार भी मिले एक रोज़ जब यूँ ही दोस्ती का हिसाब करने बैठे हमने जाना की कुछ दोस्त ऐसे भी थे जो किसी भी खेमे में न बट सके कुछ नायाब जो दोस्त से ज़्यादा थे,…

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    एक ऐसा यार

    न पूछे क्यों न सोचे कभी दो बार लड़ जाए भिड़ जाए सुन के बस एक पुकार रब करे सबको मिले बस एक ऐसा यार खाए जो बड़ी क़समें उठाए जो नख़रे हज़ार निभाए सारी वो रस्में झेलकर भी सितम करे प्यार दुआ है संग सदा मिले बस एक ऐसा यार पूरी करे जो तलब कश हो या जाम मिले तैयार महूरत मान ले फ़रमाइश को न दिन देखे न देखे वार जब मिले तेरे सा मिले बस एक ऐसा यार

  • Anecdotes,  Musings & Short Stories

    Kuch Kahaniyan – Ep5 The Final Take

    OK here is a different take on growing up. One that does not involve alcohol. Well, after all its not just alcohol that makes people do silly things…. right?Yes, this one is about Love and to some measure about Sex and Dhoka as well 😉 6 The late 80’s and the early 90’s had lots of stuff happening for, around and to us…Trysts with alcohol, Driving Licenses, Rock Music and Girls!!!! We were in our mid-teens and the other gender had started making its presence or need felt amongst us. Believe me, for those of us who spent long years in Boys Only schools they had a lot more importance…

  • Anecdotes,  Musings & Short Stories

    Kuch Kahaniyan – Ep4

    5 They say going through the grind of an engineering course does, if not anything else, hone inquisitive thinking. You question the way things work, move yada yada yada. Mind you the inquisitive thinking takes an experiential form when slightly inebriated.OK, that is just a technical way of saying you get stubborn and stupid when you drink your self silly. This was the final year of engineering for some of us. The last few months of any course often witness an increased level of bonding (read alcohol consumption) between friends. Our institution was located in Tumkur a fair way away from the city of Bangalore, a town devoid of any…

  • Anecdotes,  Musings & Short Stories

    Kuch Kahaniyan – Ep3

    4 I forget the year but this incident happened during one of my visits back to Delhi from my engineering college.It was a cold winter evening, of the sort that called for a rendezvous with friends and needless to say a couple of stiff-ones to beat the chill. Money was scarce and we were consciously frugal. The venue invariably used to be one of the parks or parking ares in the neighbourhood. The colony folks had kinda resigned to the fact that these kids were incorrigible. We would also get by scott-free because we were the kids who did enough and more for the Residents Welfare Association during the annual…