कविता (Kavita)

कविता के बिना मैं अधूरा हूँ 
जब चोट मुझे कोई लगती है

लहू को सियाही बना के बहाता हूँ
शब्द जो सिर्फ़ मेरी कलम कह सकती है

मैं अपने ही वास्तव से उन्हें चुरा के लाता हूँ
मेरे लिखे सारे पन्ने मेरी अपनी ही तो हस्ती है

जब भी मैं ख़ुश या उदास होता हूँ
और बेचैनी महसूस होने लगती है

संग सदा अपने इन शब्दों को मैं पाता हूँ
मेरी सोच, मेरे विचारों की अभिव्यक्ति है

कविता के बिना मैं अधूरा हूँ
मेरे शब्द ही मेरी पहचान मेरी शक्ति है