सवाल लाज़मी है (Sawaal Laazmi Hai)

क्यों छा रही है ये बेताबी 
क्यों फ़ैल रहा ये जज़्बा-ए-जुनून

एक सवाल तो लाज़मी है

क्या हुआ जो उमड़ रही है ये भीड़
क्या है वजह इस मायूसी की

एक सवाल तो लाज़मी है

यूँ ही नहीं चलते हैं काफ़िले
यूँ ही नहीं उठती गर्म हवाएँ

एक सवाल तो लाज़मी है

क्यों उठ रहा है हर और ये धुआँ
किधर जा रहीं हैं ये जलती मशालें

एक सवाल तो लाज़मी है

क्यों ख़फ़ा है इस मुल्क का मुस्तक़बिल
क्या माँगता है अहल-ए-वतन आख़िर

एक सवाल तो लाज़मी है

कैसे करें कम इस बेचैनी को
कैसे मनाएँ हम अपने अपनों को

एक सवाल तो लाज़मी है