• Hindi Poetry | कविताएँ

    बीते लम्हे

    बीते लम्हे, लोग और दिन
    लौट के वापस आते नहीं हैं
    गुज़रते कारवाँ के हैं ये राही
    सिर्फ़ अपने निशान छोड़ जाते हैं

    टेढ़े मेढ़े हैं जीवन के रास्ते मगर
    कई बार उसी मोड़ से जाते हैं
    चलते क़दम जाने अनजाने
    किसी मंज़र पे थम जाते हैं

    यादों को कभी मलहम बना
    तो कभी सदा कह के बुला लाते हैं
    फिर एक बार कुछ पल के लिए ही सही
    याद किसी के होने का एहसास दिलाती हैं

    यादों के कारवाँ चलते हैं जब
    निशानियों पे रास्ते फिर बन जाते हैं
    बीते लम्हे, लोग और दिन
    सब लौट आते हैं
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    सहर

    क्या एहम है जीने में
    हर ज़िन्दगी जब साथ मौत लाती है
    क्यों ढूँढे अलग अलग रास्ते
    जब मंज़िल एक बुलाती है
    
    क्या है ऐसा ख़ीज़ा में
    जो बहारों की याद सताती है
    क्यों गर्म ख़ुश्क हवाएँ
    भूली कोई ख़ुशबू साथ लातीं है
    
    भला क्या मर्ज़ है आख़िर रिश्तों का
    के हाज़िर को अनदेखा करते हैं
    जो बिछड़ गए कोई गर चले गए
    उनके लिए अश्क़ बहाते हैं
    
    हर आग़ाज़ और अंजाम के बीच
    एक कहानी आती है
    जो लफ़्ज़ों में बयान होती नहीं
    फ़क़त देखी दिखाई जाती है
    
    क्या हासिल है ग़म भरने में
    ये जान कर के ख़ुशी आती जाती है
    क्यों किसी शब के अँधेरे को ज़ाया कहें
    गुज़र के जब वो रौशन सहर लाती है 
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    एक ऐसा यार

    Art : Rachel Coles
    न पूछे क्यों
    न सोचे कभी दो बार
    लड़ जाए भिड़ जाए
    सुन के बस एक पुकार
    रब करे सबको मिले
    बस एक ऐसा यार
    खाए जो बड़ी क़समें
    उठाए जो नख़रे हज़ार
    निभाए सारी वो रस्में
    झेलकर भी सितम करे प्यार
    दुआ है संग सदा मिले
    बस एक ऐसा यार
    पूरी करे जो तलब
    कश हो या जाम मिले तैयार
    महूरत मान ले फ़रमाइश को
    न दिन देखे न देखे वार
    जब मिले तेरे सा मिले
    बस एक ऐसा यार
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    साया

    लिखने की चाहत तो बहुत है
    जाने क्यों कलम साथ नहीं
    जज़्बात सियाही से लिखे लफ़्ज़ नहीं
    मेरे बेलगाम बहते अश्क़ बयां कर रहें हैं
    
    अभी तो बैठे थे फ़िलहाल ही लगता है
    पलट गयी दुनिया कैसे ये मालूम नहीं
    जाने वाले की आहट भी सुनी नहीं
    सर पे से अचानक साया हठ गया है
    
    वो जो ज़ुबान पे आ के लौट गयी वो बातें बाक़ी है
    अब कहने का मौक़ा कभी मिलेगा नहीं
    हाय वक़्त रहते क्यों कहा नहीं
    कुछ दिन से ये सोच सताती है
    
    अल्फ़ाज़ बुनता हूँ मगर उधड़ जाते हैं
    ख़यालों जितना उन में वज़न नहीं
    डर भी है ये विरासत कहीं खोए नहीं
    मगर यक़ीन-ए-पासबाँ भी मज़बूत है
    
    लिखने की चाहत तो बहुत है
    जाने क्यों कलम साथ नहीं
    जज़्बात सियाही से लिखे लफ़्ज़ नहीं
    मेरे बेलगाम बहते अश्क़ बयां कर रहें हैं
    
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    पहल

    खुद से कुछ कम नाराज़ रहने लगा हूँ
     
    ऐब तो खूब गिन चुका
    खूबियाँ अपनी अब गिनने लगा हूँ मैं
     
    आजकल एक नयी सी धुन में लगा हूँ
    अपने ख्यालों को अल्फाजों में बुनने लगा हूँ मैं
     
    गैरों के नगमे गुनगुनाना छोड़ रहा हूँ
    अब बस अपने ही गीत लिखने चला हूँ मैं
    कुछ अपने से रंग तस्वीर में भरने लगा हूँ
    आम से अलग एक पहचान बनाने चला हूँ मैं
     
    अंजाम से बेफिक्र एक पहल करने चला हूँ
    अपने अन्दर की आवाज़ को ही अपना खुदा मानने लगा हूँ मैं
     
    खुद से कुछ कम नाराज़ रहने लगा हूँ
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    परिचय

    आज धूल चटी किताबों के बीच
     ज़िन्दगी का एक भूला पन्ना मिल गया
     धुँधले से लफ़्ज़ों के बीच
     पहचाना सा एक चहरा खिल गया
     अलफ़ाज़ पुराने यकायक जाग उठे
     मानो सार नया  कोई मिल गया
     दो पंक्तियों के चंद लमहों में
     एक पूरा का पूरा युग बीत गया
     आज धूल चटी किताबों के बीच
     मुझ को मैं ही मिल गया
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    ए ज़िन्दगी

    ज़िंदगी तुझ से न कम मिला न ही ज़्यादा पाया
    खुशियाँ मिली तो गमों का भी दौर आया
    मिली दीवाली सी रोशनी तो कभी दिया तले अंधेरा पाया
    तूने जब दी तनहाई मुड़ के देखा तो साथ कारवाँ पाया
    क्यों करें शोक हम तेरी किसी बात का
    क्यों ज़ाया करें अभी तुझ पे जस्बात
    तू जो भी दे मज़ा तो हम पूरा लूटेंगे
    गिरें गर कभी तो फिर उठ खड़े होंगे
    इंतेज़ार है उस दिंन का जब होंगे तेरे सामने
    तेरी हर एक देन को "once more" कहेंगे
    तब तक किसी चीज़ से शिकवा है न किसी से मलाल
    तू जो भी दे मंज़ूर है गवारा है हर हाल
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    फुर्सत

    ये फुर्सत क्यों बेवजह बदनाम है
    क्यों हर कोई यह कहता के उसको बहुत काम है
    
    इस तेज़ दौड़ती, बटे लम्हों में कटती ज़िन्दगी का, चलना ही क्यों नाम है
    कैसे रूकें, कब थामें, एक पल को भी न आराम है
    
    कब घिरे कब छटे ये बादल, आये गए जो मौसम सारे न किसी को सुध न ध्यान है
    पलक झपकते बोले और चले जो, अपना खून खुद से अनजान है
    
    ये फुर्सत क्यों बेवजह बदनाम है
    बस यही तो है जो अनमोल हो कर भी बेदाम है
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    रंग

    इस रंग बदलती दुनिया से
    हमने भी थोड़ा सीख लिया
    कुछ दुनिया से  हमने रंग लिया
    और खुद को थोडा बदल लिया
     
    कभी किस्मत ने हमको गिरा दिया
    तो कभी वक़्त ने हमें सता दिया
    सब सोचें हमको क्या मिला
    हम सोचें कितना जान लिया
    जाने पहचाने चेहरों को
    भीतर से पढना सीख लिया
    सच और झूठ के फेरों में
    काले को कोरा कहना सीख लिया
     
    कुछ खुद को थोडा बदल लिया
    कुछ दुनिया को हमने रंग दिया
     
    इस रंग बदलती दुनिया से
    हमने भी थोड़ा सीख लिया
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    तुझे उड़ना है

    तुझे उड़ना है
    
    इस लिए नहीं
    कि तुझे पँख मिलें हैं
    
    तुझे उड़ना है
    
    इस लिए
    कि तेरे दिल में अरमान हैं
    
    तुझे उड़ना है
    
    इस लिए नहीं
    कि तुझे हौंसले मिलें हैं
    
    तुझे उड़ना है
    
    इस लिए
    कि ऊपर खुला आसमान है
    
    तुझे बढ़ना है
    
    इस लिए नहीं
    कि राहें मिलीं हैं
    
    तुझे बढ़ना है
    
    इस लिए
    कि मंज़िलें तेरी पहचान हैं
    
    तुझे बढ़ना है
    
    इस लिए नहीं
    कि साथी मिलें हैं
    
    तुझे बढ़ना है
    
    इस लिए
    कि तू खुद में एक कारवाँ है
    
    तुझे फलना है
    
    इस लिए नहीं
    कि तुझमें मातृत्व है
    
    तुझे फलना है
    
    इस लिए
    कि तू ही जीवन वरदान है
    
    तुझे फलना है
    
    इस लिए नहीं
    कि आज तुम्हारा है
    
    तुझे फलना है
    
    इस लिए
    कि तू है तो कल ये जहान है
    
    हाँ तुझे फलना है
    
    हाँ तुझे बढ़ना है
    
    हाँ तुझे उड़ना है