• English Poetry

    Friendship Lane

    They’ll most certainly lie for you, 
    Spin tall tales at the drop of a hat,
    Man, they make ‘em sound so true,
    You’d kill to have a frat like that.

    Take your trip with a straight face,
    Draw immense joy from your pain,
    Cause a pain in every wrong place,
    No misses when there’s points to gain.

    Friendships made whilst still young,
    Hanging together turning days to nights,
    Meaning every word of the songs they sung,
    They turned into men destined for heights.

    Lives got lived and careers got made,
    The wheel of time continued to turn,
    Decades slowly rolled into the next decade,
    Conversations changed from heartbreaks to heartburn.

    Time reset to where they’d hit pause,
    Fifty something and they met again,
    Everything back to the way it was,
    Those three nights at Friendship Lane!
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    रोज़ाना (Rozaana)

    आसान नहीं है ऐसा हो जाना
    होता भी तो नहीं है ऐसा रोज़ाना
    मिले, बैठे, फिर अपनी राह चले
    इस से ज़्यादा कौन करता है भले

    बात ये कुछ तीस बरस पुरानी है
    चंद दोस्तों की ये अजब कहानी है
    अलग भाव, अलग स्वभाव का व्यवहार था
    आपस में यूँ घुल जाना अनूठा विचार था

    लड़कपन की सूखी लकड़ियाँ तैयार थी
    बस एक अल्लढ़ चिंगारी की दरकार थी
    एक हॉस्टल के कमरे की ये दास्ताँ है
    गहरी नींव पे खड़ा ये यारी का मकान है

    कभी बिछड़े, कही झगड़े, कभी बस पड़े पड़े
    कितने दिन ढले, रातें बीतें, कितने सूरज चढ़े
    ज़िंदगी के कदम मीलों में कब कैसे बदल गए
    बाल में सफ़ेद और वज़न सालों संग बढ़ गए

    दूरी जो थी यारी को सिमटा मिटा ना सकी
    नोक झोंक, छेड़ छाड़ की आग बुझी न रुकी
    जीवन के कई उतार-चढ़ाव दोस्तों ने देखें हैं
    साथ खड़े रहने, निभाने के क़िस्से अनोखे हैं

    हर गुट, हर कहानी में कई किरदार होतें हैं
    किसी सूरत में सेना, किसी में सरदार होते हैं
    जो ना देखे ऊँच-नीच ना देखे दुनियादारी
    कुछ ऐसी और लंबी चली है ये गाड़ी हमारी

    अब तक सँभाली है बस यूँ ही चलानी है
    बावजूद दूरी या मजबूरी पूरी निभानी है
    क्यों की आसान नहीं है ऐसा हो जाना
    और होता भी तो नहीं है ऐसा रोज़ाना
  • English Poetry

    Time Travellers

    Two wonderful days that I’ve spent
    Happiness that was heaven sent

    Afternoons filled with tales of old
    Some repeats and many untold

    A lifetime re-lived in just few hours
    Great escapes and magical powers

    Tricks and pranks, our devious ways
    Endless nights that ran into days

    God’s angels or devil’s messengers
    My supporters and firm challengers

    So believe that true friends infuse
    That spark in our life, brighter hues

    Fellow travellers, my companions
    Badges of honour, my medallions

    Forever together, win or lose
    You’re family that I’d always choose
  • English Poetry

    A Beautiful Friendship

    Wonder if things would've changed
    Or would they have remained the same
    Would we have grown into wise old men by now
    Or remained boys taking things as they came
    
    Life would have kept us together I'd reckon
    Circumstances no doubt would've made our journeys part
    It would have remained a beautiful friendship
    If only a premature end did'nt beckon
    
    Had life not made other plans
    You'd have turned 50 today
    Imagine all that we'd have done
    The boys in us would've had their way
    
    So in your memory we shall pour out one
    Sing songs all night from an infinite playlist
    Do things the only way we would have done
    Have one more and one more till morning come
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Us Raat Ki Baat (उस रात की बात)

    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    दिलचस्प क़िस्सों और यादों की होड़ सी थी
    नये पुराने रिश्तों बीच लगी एक दौड़ सी थी
    
    चेहरे जो धुंधला गए थे वो साफ़ खिल गए
    कुछ मलाल भी होंगे जो उस रात धुल गए
    
    बीते सालों का असर कहीं छिपा कहीं ज़ाहिर था
    गहराते रिश्तों के मंज़र का हर शक्स नाज़िर था
    
    इतनी हसीन थी मुलाक़ातें के शाम कम पड़ गई
    या यूँ कह दें की अपना काम बहती जाम कर गई
    
    ख़ुशियों का उठता ग़ुबार बारिश भी दबा न सकी
    लगी जो आग है मिलन की वो कब है रुकी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Dil Chahta Hai (दिल चाहता है)

    इस दौड़ती थकाती ज़िंदगी से
    एक पल चुराना ये दिल चाहता है
    किसी भूले से पसंदीदा एक गीत के
    दो बोल गुनगुनाना ये दिल चाहता है

    बिन मतलब बंध जाते थे जो
    ऐसे मीत ये दिल चाहता है
    बिन मौसम बेइंतहा बरसती रहे जो
    ऐसी प्रीत ये दिल चाहता है

    ख़र्च अपने किसी शौक़ पे कर सकें
    वो फ़ुरसत ये दिल चाहता है
    चल पड़ें किसी रूमानी डगर पर
    ऐसी हिम्मत ये दिल चाहता है

    कथनी करनी में भेद ना हो जिनमें
    वो बोल बोलना ये दिल चाहता है
    मर्यादा जो मनसपूर्ण और सच्ची हो
    वो लेना-देना ये दिल चाहता है

    चाहत में जहाँ निजी स्वार्थ न हो
    वो दुनिया ये दिल चाहता है
    बिन माँगे पूरी करे जो सबकी दुआ
    ऐसा ख़ुदा ये दिल चाहता है
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Humsafar(हम)सफर

    मीलों का ये सफ़र है
    तेरे संग जो है तय करना
    एक नहीं कई मंज़िलें हैं
    तेरे साथ जिनको है पाना


    मिलेंगे राहगुज़ार और भी हमें
    कुछ मिलनसार कुछ बदमिज़ाज होंगे
    कोई उकसायेगा कोई भटकायेगा हमें
    जूझेंगे उनसे और हर सितम झेल लेंगे


    मुश्किलें भी कई पेश आयेंगी
    हालात हमारे ख़िलाफ़ होंगे
    कुछ पल को राहें भी जुदा लगेंगी
    मगर एक दूसरे को हम सँभाल लेंगे


    सात कदम, सात जन्म, सात समंदर
    मेरी नज़र में हर दूरी तेरी सोहबत में कम है
    तू जहाँ वहीं चैन वहीं सुकून है दिल के अंदर
    मोहब्बत और दोस्ती पाने नहीं निभाने का नाम है
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    रिश्ता

    न पूछो क्यों
    बस इतना जान लो

    ये रिश्ता गहरा है

    दूरियाँ भले कितनी हों
    तार जुड़े ही रहेंगे

    ये रिश्ता गहरा है

    वक़्त के पन्ने
    चाहे जितने पलट लो

    ये रिश्ता गहरा है

    ख़याल मिले थे
    दिल मिलते रहेंगे

    ये रिश्ता गहरा है

    एक उम्र निभाई है
    एक उम्र का वादा है

    ये रिश्ता गहरा है

  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Saath (साथ)

    Chaos of Commitment
    Water Colour by Cathy Hegman
    जब मंज़िलें धुंदली हों 
    और जब रास्ते हो अनजाने 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब सासें फूलने लगे 
    और चलना हो नामुमकिन 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब हौंसले हो तंग 
    और जब हिम्मत न बन्धे 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब उम्मीदें जॉए बिखर 
    और निराशा ही हाथ लगे 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब जेबें हो खाली 
    और तेज़ भूक लगे 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब चिलचिलाती हो धुप 
    और कहीं छाँव न दिखे 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब सब दामन चुरा लें 
    और कोई मान न दे 
    क्या तुम साथ दोगे 
    
    जब सात वचन मैं लूँ  ये 
    और हाँ कह निभाऊँ उम्र भर उन्हें 
    क्या तुम साथ दोगे