Reflections @ 50 plus
Bye-bye Birdie

The wheel of time has spun,
One of our brood has spread her wings and flown away.
A new chapter in life’s just begun.
She steps through the portals of her university and begins a new day.
It’s a strange sensation, a concoction of anxiety and apprehension.
There is also an overwhelming sense of joy that seems to pervade.
Protected and cared for all this while she encounters a new dimension.
Images of her first day at school keep getting played and replayed.
I remember the wide-open eyes, her as a newborn when I first held.
You’ve raised her well, Mama, know that she’ll quickly hit her stride.
I am beside myself seeing her turn into this woman who’s self-propelled.
It won’t be long before it’s her time to shine and you swell with pride.
And from here on, we all learn to live our lives anew.
As the older one finds herself, toughens up and gains knowledge.
We as parents fend and fight for one instead of two.
Students once again, learning lessons from life -the eternal college.ख़ामोशी (Khamoshi)

ख़ामोशी के खालीपन में
मैंने ख़ुद को खो दिया
तेरे इश्क़ के पागलपन में
अपनी हस्ती को ही डुबो दिया
तेरी यादों की बेइन्तहाई में
दिन और रैन की सुद को छोड़ दिया
बिछोड़े की इस तन्हाई में
मैंने अपनों से रिश्ता तोड़ दिया
तेरी बेवफ़ाई की इन बातों में
जाने कैसे ग़म से नाता जोड़ दिया
सजदे किये थे जिस रब की ख़ुदाई में
उसी ख़ुदा ने अपना रुख मोड़ दियामाँ (Maa)

जाने कितनी दफ़ा कंधे पे तेरे सर रख के घंटों सोया हूँ मैं जाने कितनी दफ़ा तेरे आँचल तले बिलख़ के रोया हूँ मैं जाने कितनी दफ़ा मेरी छोटी सी छींक ने रात भर जगाया होगा जाने कितनी दफ़ा मेरी किसी नादानी ने तेरा दिल दुखाया होगा जाने कितनी दफ़ा मेरे भविष्य की चिंता तूने की होगी जाने कितनी दफ़ा मेरी एक पुकार पे तुम हर काम छोड़ भागी होगी जाने कितनी दफ़ा ये सोचता हूँ क्या मैंने तुम्हें गर्वान्वित होने का कभी मौक़ा दिया जाने कितनी दफ़ा ये सोचता हूँ क्या अलग करता कैसे मैंने तुम्हें यूँ अचानक खो दिया जाने कितने दफ़ा मैं ख़ुद को और लोग मुझको इसे होनी की चाल बताते हैं जाने कितनी दफ़ा यादें और ख़याल तेरे होने का एहसास दिलाते हैं जाने कितनी दफ़ा फिर दो आसूँ बहा तुम्हारा स्मरण करता हूँ जाने कितनी दफ़ा शीश झुका के माँ तेरे जीवन को नमन करता हूँ
जो कह न सका

कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन आज भी कहा नहीं जाता ऐसा होता तो है मगर होता क्यों है के दिल में आया ख़याल अंजाम नहीं पाता काश के कह दिया होता जो कहना था फिर वक़्त पे मैं ये इल्ज़ाम न लगाता आपकी इज़्ज़त करना जिसे सोचा था उस एहतिराम को बीच का फ़ासला न बनाता अब उम्मीद यही करता हूँ हर बार ये के सुन ही लेते थे आप जो मैं ज़ुबान पे न लाता यक़ीनन पहुँच रहा होगा मेरा दर्द भी ये वरना इतना मुझ से अकेले सँभाला नहीं जाता बस गयें हैं आप शायद अब कहीं मुझ में ही आप से जुदा चेहरा मेरा आईना नहीं बतलाता हर रोज़ रूबरू होता हूँ मैं यूँ अब आप से इसीलिए मैं इस बात का शोध नहीं मनाता कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन आज भी कहा नहीं जाता
Kisi Roz (किसी रोज़)

कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे एक बार पीछे मुड के देखा के नहीं याद में हमारी दो बूँद रोये के नहीं कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे जब भी गुज़रे होगे तुम गली से हमारी एक नज़र तो फ़ेराई होगी दर पे हमारी कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे वो जो यादें बनाई थीं उन यदों का क्या हुआ वो जो क़समें लीं थी उन क़समों का क्या हुआ कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे के इतने बरसों में तुमने क्या क्या भुला दिया जो थी कशिश दरमियाँ उसे कैसे मिटा दिया कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे क्या समझे थे जिसे वो प्यार था भी या नहीं क्या ये दर्द बेवजह है और तुम बेवफ़ा नहीं कभी किसी रोज़ जब मिलोगे तो पूछेंगे
Humsafar(हम)सफर

मीलों का ये सफ़र है
तेरे संग जो है तय करना
एक नहीं कई मंज़िलें हैं
तेरे साथ जिनको है पाना
मिलेंगे राहगुज़ार और भी हमें
कुछ मिलनसार कुछ बदमिज़ाज होंगे
कोई उकसायेगा कोई भटकायेगा हमें
जूझेंगे उनसे और हर सितम झेल लेंगे
मुश्किलें भी कई पेश आयेंगी
हालात हमारे ख़िलाफ़ होंगे
कुछ पल को राहें भी जुदा लगेंगी
मगर एक दूसरे को हम सँभाल लेंगे
सात कदम, सात जन्म, सात समंदर
मेरी नज़र में हर दूरी तेरी सोहबत में कम है
तू जहाँ वहीं चैन वहीं सुकून है दिल के अंदर
मोहब्बत और दोस्ती पाने नहीं निभाने का नाम हैतक़दीर
एक दिन तक़दीर रुबरू हुई
पूछने लगी कैसे हैं हाल
जवाब में खुद ही बोली
मैं तुम्हारी हूँ यही है कमाल
फिर बीते कुछ और दिन महीने साल
ज़िंदगी की किताब में बाब जुड़ते गए
होने लगा कुछ और यक़ीन उस मुलाक़ात पे
दौर कुछ और कुछ हसीं कुछ तंग गए
बस वो दिन था और एक आज है
हर गुज़रे पल की एहमियत पहचानते हैं
मिली थी जो उस दिन यकायक हमें
वो तक़दीर तुम हो बस ये जानते हैं
तुम ख़ुश रहो ख़ुशहाल रहो
हर दिन ये दुआ माँगते हैं
तुम्हारी हर ख़ुशी में है हमारी ख़ुशी
उस रोज़ से हम यही मानते हैंSaath (साथ)

Chaos of Commitment
Water Colour by Cathy Hegmanजब मंज़िलें धुंदली हों और जब रास्ते हो अनजाने क्या तुम साथ दोगे जब सासें फूलने लगे और चलना हो नामुमकिन क्या तुम साथ दोगे जब हौंसले हो तंग और जब हिम्मत न बन्धे क्या तुम साथ दोगे जब उम्मीदें जॉए बिखर और निराशा ही हाथ लगे क्या तुम साथ दोगे जब जेबें हो खाली और तेज़ भूक लगे क्या तुम साथ दोगे जब चिलचिलाती हो धुप और कहीं छाँव न दिखे क्या तुम साथ दोगे जब सब दामन चुरा लें और कोई मान न दे क्या तुम साथ दोगे जब सात वचन मैं लूँ ये और हाँ कह निभाऊँ उम्र भर उन्हें क्या तुम साथ दोगे
I Believe
Sunlight streams through my window But fails to lighten up my dark corners The corners of my vacant heart Life just passed me by While I sat making other plans A long winding highway with pain at every bend A journey spent in waiting for the next milestone Just tunnels without any light at the end Good things come to those who wait they say How much longer? How much further? No stopovers, no goodbyes No fleeting moments stolen from life Lifes just a one way track headed nowhere Hope is the fuel I run on And I still wait because I believe Yes, I believe