• Hindi Poetry | कविताएँ

    एहसास (ehsaas)

    आज दिल में एक भारी सा एहसास है
    यादों से लदी हुई हर घड़ी हर सॉस है

    वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम है ऐसा कहते हैं
    जाने क्यों मगर ज़िन्दगी के घाव ताज़ा ही रहते हैं

    सजा के तो कई अरमान रखे थे यूँ लोगों ने
    अब तो वो भी ग़ुम हो गए संजोए थे जिन्होंने

    आँगन में धूप तो आज भी वही खिलती है
    बारिश की बूँदे वही अटखेलियाँ करती हैं

    पसंदीदा पकवानों में सिमटा उस रिश्ते का ज़ायक़ा है
    बच्चों की किसी हरकत में अब होता आभास है

    अकेले हो जाने का दर्द यूँ बस सम्भाला है मैने
    दिल में हैं महफूज़ अज़ीज़ जहाँ रहना था उन्होंने
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    माँ (Maa)

    जाने कितनी दफ़ा 
    कंधे पे तेरे सर रख के 
    घंटों सोया हूँ मैं
    
    जाने कितनी दफ़ा
    तेरे आँचल तले
    बिलख़ के रोया हूँ मैं
    
    जाने कितनी दफ़ा
    मेरी छोटी सी छींक ने
    रात भर जगाया होगा
    
    जाने कितनी दफ़ा
    मेरी किसी नादानी ने
    तेरा दिल दुखाया होगा
    
    जाने कितनी दफ़ा
    मेरे भविष्य की
    चिंता तूने की होगी
    
    जाने कितनी दफ़ा
    मेरी एक पुकार पे 
    तुम हर काम छोड़ भागी होगी
    
    जाने कितनी दफ़ा 
    ये सोचता हूँ क्या मैंने तुम्हें
    गर्वान्वित होने का कभी मौक़ा दिया
    
    जाने कितनी दफ़ा 
    ये सोचता हूँ क्या अलग करता
    कैसे मैंने तुम्हें यूँ अचानक खो दिया
    
    जाने कितने दफ़ा
    मैं ख़ुद को और लोग मुझको
    इसे होनी की चाल बताते हैं
    
    जाने कितनी दफ़ा
    यादें और ख़याल
    तेरे होने का एहसास दिलाते हैं 
    
    जाने कितनी दफ़ा
    फिर दो आसूँ बहा
    तुम्हारा स्मरण करता हूँ
    
    जाने कितनी दफ़ा
    शीश झुका के माँ
    तेरे जीवन को नमन करता हूँ
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    न्योता (Nyota)

    महज़ वक़्त के बीतने से 
    किसीकी याद घटती नहीं
    
    बिछोड़े के काटे से
    रिश्तों कि डोर कटती नहीं
    
    दिलों में छपी तस्वीरें
    अंधेरों में ओझल होतीं नहीं
    
    विचलित मन की आँखों में
    नींद आसानी से समाती नहीं
    
    ख़यालों में गूँजती पुकार
    खुली आँख सुनाई देती नहीं
    
    ये जो ऋणों का बंधन है 
    वो चुकाये उतरता नहीं
    
    कोई है उस पार गर जहाँ तो
    बिन बुलावे के कोई जा पाता नहीं
    
    फ़िलहाल कोशिश है खुश रखें और रहें 
    दुःख अपना अपनों पे और लादा जाता नहीं
    
    जीवन है,  हर धुन, हर रंग में रमना है, रमेंगें
    द्वार पे जब तक यम न्योता ले के आता नहीं 
  • English Poetry

    A Beautiful Friendship

    Wonder if things would've changed
    Or would they have remained the same
    Would we have grown into wise old men by now
    Or remained boys taking things as they came
    
    Life would have kept us together I'd reckon
    Circumstances no doubt would've made our journeys part
    It would have remained a beautiful friendship
    If only a premature end did'nt beckon
    
    Had life not made other plans
    You'd have turned 50 today
    Imagine all that we'd have done
    The boys in us would've had their way
    
    So in your memory we shall pour out one
    Sing songs all night from an infinite playlist
    Do things the only way we would have done
    Have one more and one more till morning come
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Us Raat Ki Baat (उस रात की बात)

    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    दिलचस्प क़िस्सों और यादों की होड़ सी थी
    नये पुराने रिश्तों बीच लगी एक दौड़ सी थी
    
    चेहरे जो धुंधला गए थे वो साफ़ खिल गए
    कुछ मलाल भी होंगे जो उस रात धुल गए
    
    बीते सालों का असर कहीं छिपा कहीं ज़ाहिर था
    गहराते रिश्तों के मंज़र का हर शक्स नाज़िर था
    
    इतनी हसीन थी मुलाक़ातें के शाम कम पड़ गई
    या यूँ कह दें की अपना काम बहती जाम कर गई
    
    ख़ुशियों का उठता ग़ुबार बारिश भी दबा न सकी
    लगी जो आग है मिलन की वो कब है रुकी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
    
    उस रात की बात कुछ और ही थी
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    Tijori (तिजोरी)

    
    
    
    
    लम्हा लम्हा बीत रही है ज़िंदगी
    जीवन की अपनी ही एक ताल है
    वक्त की किसी से नहीं है बंदगी
    हाल-ए-जहाँ से बेवास्ता चाल है
    
    बचपन जवानी की चोटियाँ
    पीछे कहीं दूर छूठ गयीं
    ये अधेड़ उम्र की है वादियाँ
    बहती दरिया है, मोड़ आगे हैं कयीं
    
    कैसे ठहरें बस जायें किसी एक लम्हे में हम
    बिखरे पड़े हैं यादों के ढेरों मोती
    चमक है कुछ में और कुछ में है कम 
    किसी लम्हे में सुबह, किसी में शाम नहीं होती
    
    भर तो ली है हमने यादों से तिजोरी
    वक्त के कहाँ हुए हम धनी हैं
    बाज़ार में माज़ी की क़ीमत है थोड़ी
    क्या मालूम बस सही परख़ की कमी है
    
    टिक टिक करता रहता है गजर
    मसखरी सुई भी ज़िद पे अड़ी है
    एक तू ही नहीं महफ़िल में बेख़बर
    ग़ौर कर ऐसे रईसों की भीड़ लगी है
    Listen to Tijori – Recited by Sudhām
  • English Poetry

    I am YOU!

    Perhaps it’s always been the case
    But I have begun to feel it more these days
    
    In important and in those little things
    In familiar yet in undescribable ways
    
    I notice it in the way I speak
    Even in the way I react to what I eat
    
    It manifests in my constant worry
    I have changed for sure and it’s bittersweet 
    
    Each day I look in the mirror the feeling grows
    It causes me to miss you more and then not to
    There are no two ways about it, I am sure
    I was “me” now I am “you
  • English Poetry

    Ode to a Sibling

    Is there a burial ground for a heartache?
    A deep distant corner to bury your feelings
    Of the sort that were suppressed
    Emotions left unexpressed
    
    The ache of a playmate lost
    The agony of a companion gone
    The hand that helped me walk
    The one who shaped the way I write and talk
    Never to come back again ..you're gone without a trace
    
    Every time I've thought of you I've held back
    Stopped myself from wondering
    How it would have been had you been around
    How you'd have felt
    In my moments of joy and those when I was in pain
    
    Years have passed yet the hurt remains
    The unsaid and the unreleased is what I pen today
    Don't need photographs on the wall
    I close my eyes... I see your face
  • Hindi Poetry | कविताएँ

    चौथ का चाँद

    एक ऐसी ही चौथ की रात थी 
    जब एक चाँद बादलों में छिप गया
    
    फिर लौट के वो दिन आ गया
    एक चौथ फिर से आ गयी
    
    फिर आँखें यूँ ही नम होंगी
    यादें फिर क़ाबू को तोड़ेंगी
    
    वक़्त थमता नहीं किसी के जाने से 
    फिर भी कुछ लम्हे वहीं ठहर जातें हैं
    
    लाख़ आंसुओं के बह जाने पर भी 
    कुछ मंज़र आँखों का घर बना लेते हैं
    
    यक़ीन बस यही है के एक दिन
    समय संग पीड़ ये भी कम होगी
    
    फ़िलहाल नैन ये भीगे विचरते हैं
    एक झपक में एक बरस यूँ बीत गया
    
    किसी दिवाली दीप फिर जलेंगे
    उन दियों में रोशन फिर ख़ुशियाँ होंगी
    
    छटेंगे बादल चाँद निकलेगा जब
    इंतेज़ार अब उस चौथ का है
    
  • English Poetry

    A Date with a Memory

    A Date with a Memory
    A Marked Calendar!
    How does one prepare
    To face impending despair
    What do you do
    When you know the blues are going to hit you
    You see the pages of calendar turn
    A date with a memory awaits
    Passing time hasn't yet healed the burns
    Of a day when you were hit by a cruel twist of fate
    You try to move on
    Carefully treading down memory lane
    Past flashing images of a loved one gone
    The heart laments, aches and pains
    The day passes punctuated with awkward silences
    With the mind and heart attempting conversation
    What one says the other refuses
    Each year its the same situation
    Someday the mind hopes the heart shall learn
    To look back and remember
    The years of pure joy 
    And not just one bad day in September