बिछोड़ा (Bichchoda)

आज का ये कलाम 
बिछड़े हुए दोस्त के नाम

संग अगर तू आज भी मेरे होता
तो ये दिल धड़कन से जुदा न होता

लिखी दोस्ती जिस कलम से, सियाही कम थी
रुके हुए हैं आँसू वहीं, आँखें तो बरसों से नम थीं

आज भी जब कहीं यारों की महफ़िल सजती है
यादों की पूर्वाइयाँ बड़ी ज़ोरों से चलने लगतीं हैं

लड़कपन की उन गलियों को फिर घूम आतें हैं
कुछ मौके साथ अपने बिछोड़े का दर्द लाते हैं